CIBIL Score Update Today आज के समय में सिबिल स्कोर सिर्फ एक नंबर नहीं बल्कि आपकी पूरी वित्तीय पहचान बन चुका है। बैंक लोन देना हो, क्रेडिट कार्ड जारी करना हो या फिर किसी बड़ी फाइनेंशियल सुविधा का लाभ देना हो, हर जगह सबसे पहले आपका CIBIL Score देखा जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने सिबिल स्कोर की गणना प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव सीधे तौर पर करोड़ों लोगों के लोन और क्रेडिट भविष्य को प्रभावित करने वाला है।
आरबीआई का यह कदम डिजिटल लेनदेन और बदलती फाइनेंशियल आदतों को देखते हुए लिया गया है। अब केवल समय पर किस्त भरना ही काफी नहीं होगा, बल्कि आपका पूरा वित्तीय व्यवहार देखा जाएगा। इससे सिबिल स्कोर ज्यादा पारदर्शी और वास्तविक बनेगा।
पुरानी CIBIL Score प्रणाली की कमियां
अब तक सिबिल स्कोर मुख्य रूप से इस बात पर आधारित था कि आपने अपने लोन और क्रेडिट कार्ड की किस्तें समय पर चुकाई हैं या नहीं। अगर भुगतान समय पर होता था तो स्कोर अच्छा रहता था और देरी होने पर स्कोर गिर जाता था। यह तरीका सरल जरूर था, लेकिन यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी को नहीं दर्शाता था।
डिजिटल दौर में लोग UPI, ऑनलाइन लोन ऐप्स और शॉर्ट टर्म क्रेडिट का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में सिर्फ भुगतान इतिहास से किसी की आर्थिक स्थिति का सही आकलन संभव नहीं था। यही वजह है कि आरबीआई को इस सिस्टम में बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
नई CIBIL Score गणना प्रणाली में क्या बदला
नई व्यवस्था में अब सिर्फ समय पर भुगतान ही नहीं बल्कि कई और पहलुओं को भी शामिल किया गया है। जैसे आप अपनी क्रेडिट लिमिट का कितना उपयोग करते हैं, कितनी बार लोन लेते हैं और कितनी जल्दी चुकाते हैं। बार बार पूरी क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल करना अब नेगेटिव माना जा सकता है।
इसके अलावा डिजिटल लेनदेन का तरीका, बैंक खातों के साथ आपकी एक्टिविटी और शॉर्ट टर्म उधार लेने की आदतें भी स्कोर को प्रभावित करेंगी। छोटी देरी या आखिरी समय पर किया गया भुगतान भी अब तुरंत रिकॉर्ड में आ जाएगा।
जिम्मेदार उधारकर्ताओं को क्या फायदा होगा
जो लोग अपने वित्तीय व्यवहार में अनुशासित हैं उनके लिए यह बदलाव किसी वरदान से कम नहीं है। समय पर भुगतान करने वाले और संतुलित तरीके से क्रेडिट इस्तेमाल करने वालों का स्कोर पहले से जल्दी सुधरेगा। ऐसे लोगों को लोन आसानी से मिलेगा और ब्याज दर भी कम हो सकती है।
खासतौर पर होम लोन और एजुकेशन लोन जैसे लंबे समय के ऋण में अच्छा सिबिल स्कोर लाखों रुपये की बचत करा सकता है। यह नई प्रणाली जिम्मेदार लोगों को प्रोत्साहित करने का काम करेगी।
लापरवाह उधारकर्ताओं के लिए क्यों बढ़ेगी परेशानी
जो लोग बार बार लोन लेते हैं, पूरी क्रेडिट लिमिट खर्च कर देते हैं या भुगतान में ढिलाई बरतते हैं उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब छोटी गलतियां भी नजरअंदाज नहीं होंगी।
एक साथ कई लोन चल रहे हैं या नियमित रूप से मिनिमम अमाउंट का भुगतान किया जा रहा है तो यह स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में नया लोन मिलना कठिन हो सकता है।
भारतीय क्रेडिट संस्कृति पर इसका असर
यह बदलाव सिर्फ सिबिल स्कोर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि लोगों की सोच भी बदलेगा। लोग अब बिना जरूरत के क्रेडिट लेने से बचेंगे और खर्च पर नियंत्रण रखना सीखेंगे। इससे देश में वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।
लंबे समय में यह नई प्रणाली बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाएगी। उपभोक्ताओं को अपने वित्तीय स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी इसका फायदा होगा।
निष्कर्ष
आरबीआई द्वारा किया गया यह बदलाव सिबिल स्कोर को ज्यादा निष्पक्ष और आधुनिक बनाता है। अब सिर्फ समय पर भुगतान ही नहीं बल्कि पूरा वित्तीय व्यवहार मायने रखेगा। जो लोग समझदारी से क्रेडिट का उपयोग करेंगे उन्हें भविष्य में बड़ा लाभ मिलेगा।